المَكتَبَةُ الشَّامِلَةُ السُّنِّيَّةُ

الرئيسية

أقسام المكتبة

المؤلفين

القرآن

البحث 📚

فلم يتفرد به حجاج، بل تابعه أبو معاوية، عن إسماعيل - تنبيه الهاجد إلى ما وقع من النظر فى كتب الأماجد - جـ ١

[أبو إسحق الحويني]

فهرس الكتاب

- ‌بسم الله الرحمن الرحيم

- ‌مقدمة الطبعة الأولي

- ‌1

- ‌ 2

- ‌3

- ‌4)

- ‌ 5

- ‌(6

- ‌7

- ‌8

- ‌9

- ‌10

- ‌12

- ‌14

- ‌15

- ‌16

- ‌17

- ‌18

- ‌19

- ‌(20

- ‌21

- ‌22

- ‌23

- ‌24

- ‌25

- ‌26

- ‌27

- ‌28

- ‌29

- ‌30

- ‌31

- ‌32

- ‌33

- ‌34

- ‌35

- ‌37

- ‌39

- ‌ 40

- ‌41

- ‌42

- ‌43

- ‌44

- ‌45

- ‌46

- ‌47

- ‌48

- ‌49

- ‌50

- ‌51

- ‌52

- ‌53

- ‌54)

- ‌55

- ‌56

- ‌57

- ‌58

- ‌59

- ‌61

- ‌62

- ‌63

- ‌64

- ‌65

- ‌66

- ‌67

- ‌68

- ‌69

- ‌70

- ‌71

- ‌72

- ‌73

- ‌74

- ‌75

- ‌76

- ‌77

- ‌78

- ‌79

- ‌80

- ‌81

- ‌82

- ‌83

- ‌84

- ‌85

- ‌86

- ‌87

- ‌88

- ‌89

- ‌91

- ‌92

- ‌93

- ‌94

- ‌95)

- ‌96

- ‌97

- ‌98

- ‌99

- ‌100

- ‌ 101)

- ‌102

- ‌103

- ‌104

- ‌105

- ‌107

- ‌108

- ‌109

- ‌110

- ‌111

- ‌112

- ‌113

- ‌114

- ‌115

- ‌116

- ‌117

- ‌118

- ‌119

- ‌(120

- ‌121

- ‌122

- ‌123

- ‌124

- ‌125

- ‌126

- ‌127

- ‌128

- ‌129

- ‌130

- ‌131

- ‌132

- ‌133

- ‌134

- ‌135

- ‌136

- ‌137

- ‌138

- ‌139

- ‌140

- ‌141

- ‌142

- ‌143

- ‌144

- ‌145

- ‌146

- ‌147

- ‌148

- ‌149

- ‌150

- ‌151

- ‌152

- ‌153

- ‌154

- ‌155

- ‌156

- ‌157

- ‌158

- ‌159

- ‌160

- ‌161

- ‌162

- ‌163

- ‌164

- ‌165

- ‌166

- ‌167

- ‌168

- ‌169

- ‌170

- ‌171

- ‌172

- ‌173

- ‌174

- ‌175

- ‌176

- ‌177

- ‌178

- ‌179

- ‌180

- ‌181

- ‌182

- ‌183

- ‌184

- ‌185

- ‌186

- ‌187

- ‌188

- ‌189

- ‌190

- ‌191

- ‌192

- ‌193

- ‌194

- ‌195

- ‌196

- ‌197

- ‌200

- ‌201

- ‌202

- ‌203

- ‌204

- ‌205

- ‌206

- ‌207

- ‌208

- ‌209

- ‌210

- ‌211

- ‌212

- ‌213

- ‌216

- ‌217

- ‌220

- ‌221

- ‌222

- ‌223

- ‌224

- ‌225

- ‌226

- ‌227

- ‌228

- ‌229

- ‌231

- ‌232

- ‌233

- ‌234

- ‌235

- ‌238

- ‌239

- ‌241

- ‌242

- ‌343

- ‌244

- ‌245

- ‌246

- ‌247

- ‌248

- ‌249

- ‌250

- ‌251

- ‌252

- ‌253

- ‌257

- ‌258

- ‌260

- ‌263

- ‌264

- ‌265

- ‌266

- ‌267

- ‌269

- ‌272

- ‌273

- ‌274

- ‌275

- ‌276

- ‌277

- ‌278

- ‌279

- ‌280

- ‌281

- ‌282

- ‌283

- ‌284

- ‌285

- ‌286

- ‌287

- ‌288

- ‌289

- ‌290

- ‌291

- ‌292

- ‌293

- ‌294

- ‌296

- ‌297

- ‌298

- ‌299

- ‌300

- ‌302

- ‌303

- ‌304

- ‌305

- ‌306

- ‌307

- ‌308

- ‌309

- ‌310

- ‌311

- ‌312

- ‌313

- ‌314

- ‌315

- ‌316

- ‌317

- ‌319

- ‌320

- ‌321

- ‌322

- ‌323

- ‌325

- ‌329

- ‌330

- ‌332

- ‌333

- ‌334

- ‌336

- ‌337

- ‌338

- ‌339

- ‌340

- ‌341

- ‌342

- ‌343

- ‌344

- ‌345

- ‌346

- ‌347

- ‌348

- ‌349

- ‌350

- ‌351

- ‌352

- ‌353

- ‌354

- ‌355

- ‌356

- ‌357

- ‌358

- ‌359

- ‌360

- ‌361

- ‌362

- ‌363

- ‌264

- ‌365

- ‌366

- ‌367

- ‌368

- ‌369

- ‌370

- ‌371

- ‌372

- ‌373

- ‌374

- ‌375

- ‌376

- ‌377

- ‌378

- ‌380

- ‌381

- ‌382

- ‌383

- ‌384

- ‌385

- ‌386

- ‌387

- ‌388

- ‌389

- ‌390

- ‌391

- ‌392

- ‌393

- ‌395

- ‌396

- ‌399

- ‌400

- ‌421

- ‌422

- ‌424

- ‌425

- ‌426

- ‌427

- ‌428

- ‌429

- ‌430

- ‌431

- ‌432

- ‌433

- ‌434

- ‌435

- ‌436

- ‌437

- ‌438

- ‌439

- ‌440

- ‌460

- ‌461

- ‌462

- ‌463

- ‌464

- ‌465

- ‌466

- ‌467

- ‌468

- ‌469

- ‌470

- ‌471

- ‌472

- ‌473

- ‌474

- ‌475

- ‌476

- ‌477

- ‌478

- ‌479

- ‌480

- ‌481

- ‌482

- ‌483

- ‌484

- ‌485

- ‌486

- ‌487

- ‌488

- ‌489

- ‌490

- ‌491

- ‌492

- ‌493

- ‌494

- ‌495

- ‌496

- ‌497

- ‌498

- ‌499

- ‌500

الفصل: فلم يتفرد به حجاج، بل تابعه أبو معاوية، عن إسماعيل

فلم يتفرد به حجاج، بل تابعه أبو معاوية، عن إسماعيل بن أبى خالد، عن قيس بن أبى حازم، عن جرير بن عبد الله أن رسول الله صلى الله عليه وسلم بعث سرية إلى خثعم، فاعتصم ناسٌ بالسجود، فأسرع فيهم القتل، فبلغ ذلك النبى صلى الله عليه وسلم، فأمر لهم بنصف العقل، وقال:" أنا برىء من كل مسلمٍ يقيمُ بين أظهر المشركين " قالوا: يا رسول الله! ولم؟ قال: " لا ترايا نارُهما".

أخرجه أبو داود (2645) ، والترمذى (1604) ، وابن الأعرابى فى " المعجم "(ق 84/1-2) ، والطبرانى فى " الكبير "(ج2/رقم 2264) ، والبيهقى (8/131 و 9/142) وفى " الشعب "(9374) من طرقٍ عن أبى معاوية.

‌350

- وأخرج أبو داود (4303) والترمذى (1366) ، وابن ماجة (2466) ، والبيهقى (6 / 136) من طريق شريك النخعي، عن أبي إسحاق عن عطاء، عن رافع بن خديج مرفوعاً:" من زرع في أرض قوم بغير إذنهم فليس له من الزرع شيء، وله نفقته ".

قال الترمذيُّ:

" هذا حديث حسن غريب، لا نعرفه من حديث أبي إسحاق، إلَاّ من الوجه من حديث شريك بن عبد الله. . . قال: وسألت محمدا بن إسماعيل عن هذا الحديث، فقال: هو حديث حسن، وقال: لا أعرفه من حديث أبي إسحاق إلا من رواية شريك ".

ونقل البيهقى عن أبى سليمان الخطابى قال: وحدثنى الحسن بن يحيى، عن موسى بن هارون الحمال أنه كان ينكر هذا الحديث ويضعَّفُهُ ويقول:

ص: 435